• विभिन्न स्तरों पर पाण्डुलिपि प्रलेखन और संरक्षण में संलग्न भागीदार संस्थानों की पहचान की और उनका एक नेटवर्क तैयार किया|
    • देश भर में 57 पाण्डुलिपि संसाधन केंद्रों (/एननमामि/पाण्डुलिपि-संसाधन-केंद्र) (एमआरसी) का गठन किया गया है जिसमें से 31 अभी कार्यरत हैं|
    • 33 पाण्डुलिपि भागीदारी केंद्रों का गठन किया (/एननमामि/पाण्डुलिपि-भागीदारी-केंद्र) (एमपीसी)|
    • 42.03 लाख पाण्डुलिपियों का प्रलेखन किया गया|
    • 2.7 मिलियन पाण्डुलिपियों पर सूचना सहित वेब आधारित राष्ट्रीय पाण्डुलिपि डेटाबेस का गठन किया गया (/एननमामि/राष्ट्रीय-डेटाबेस-पाण्डुलिपि)|
    • भारत के 18 राज्यों और सर्वेक्षणोत्तर सम्मिलित 8 राज्यों (/एननमामि/विषय-वस्तु/सर्वेक्षणोत्तर) में राष्ट्रीय सर्वेक्षण (/एनमामि/राष्ट्रीय-सर्वेक्षण) के माध्यम से पाण्डुलिपियों पर व्यापक सूचना|
    • देश भर में 50 पाण्डुलिपि संरक्षण केंद्रों (/एनमामि/पाण्डुलिपि-संरक्षण-केंद्र) (एमसीसी) का गठन किया जिसमें से 30 इस समय कार्यरत हैं|
    • पाण्डुलिपियों के भंडारण और प्रतिशेधात्मक संरक्षण पर मानक||
    • प्रशिक्षण कार्यशालाओं के माध्यम से संरक्षण में क्षमता निर्माण: 218 प्रतिशेधात्मक संरक्षण, 20 क्यूरेटिव संरक्षण संपन्न और 6840 कर्मचारियों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया|
    • 200 पाण्डुलिपि संरक्षण भागीदारी केंद्रों (/एननमामि/एमआरसी-एमसीसी-एमएपी) (एमसीपीसी) से अधिक के माध्यम से व्यापक प्रतिशेधात्मक संरक्षण|
    • अंकीकरण के तीसरे चरण के लिए पुनरीक्षित पाण्डुलिपियों के अंकीकरण पर मानक और बेंचमार्क|
    • और उसे वेबसाइट में प्रकाशित किया गया|
    • पाण्डुलिपियों के अंकीकरण (/एननमामि/अंकीकरण) का प्रथम, द्वितीय और तृतीय चरण पूरा हो चुका है और चौथा चरण जारी है| कुल 2.96 लाख पाण्डुलिपियों (2.61 करोड़ पृष्ठ) का अंकीकरण किया जा चुका है|
    • पाण्डुलिपियों के अंकीय भंडारण और उपलब्धता के लिए अंकीय पाण्डुलिपि पुस्तकालय के गठन हेतु प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया है|
    • लघु अवधि पाठ्यक्रमों, उच्च पाठ्यक्रमों और आलोचनात्मक संपादन के लिए छात्रों हेतु परियोजनाओं के माध्यम से पाण्डुलिपि अध्ययन (/एननमामि/पाण्डुलिपि-अध्ययन) कौशल विकसित किया गया| पाण्डुलिपिक शास्त्र और प्राचीन शिलालेख अध्ययन में मानव संसाधन पूल का सृजन| कुल 59 मूल स्तरीय, 22 उच्च स्तरीय और 54 विचार गोष्ठियां सम्पन्न की गईं|
    • मद्रास विश्वविद्यालय के नए कैटालोगस कैटोलोगोरम (/एननमामि/कैटोलोगस-कैटोलोगोरम) की समीक्षा की गई और उसे समर्थन दिया गया|
    • व्याख्यान श्रृंखला, विचार गोष्ठी श्रृंखला और छमाही प्रकाशन का शुभारंभ किया गया| अब तक तत्व बोध (व्याख्यान श्रृंखला) के 6 खंडों, समीक्षा (शोध पत्रों की विचार गोष्ठी श्रृंखला) के 10 खंडों, संरक्षिका (संरक्षण पर विचार गोष्ठी श्रृंखला) के 2 खंडों, प्रकाशिका (दुर्लभ पाण्डुलिपियों का आलोचनात्मक संपादन) के 30 खंडों, कृतिबोध (उच्च स्तरीय कार्यशाला में संपादित पाण्डुलिपियां) के 5 खंडों, 5 कैटलॉग और कृति रक्षण के 27 अंकों का प्रकाशन किया जा चुका है|
    • जागरुकता अभियानों, प्रदर्शनियों, थियेटर और मीडिया के माध्यम से देश भर में आउटरीच कार्यक्रम आयोजित किए| 143 सार्वजनिक व्याख्यान और 10 प्रदर्शनियां सम्पन्न की गईं|
    • सार्वजनिक कार्यक्रम आरंभ किया गया| 30 अप्रकाशित पाण्डुलिपियां प्रकाशित की गईं|